कुब्जा (Kubja) भगवान श्रीकृष्ण की एक अनन्य भक्त थी | वह महाभारत और श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित एक महत्वपूर्ण पात्र है। वह मथुरा की रहने वाली थी और कंस के राजमहल में चंदन और सुगंधित द्रव्यों की सेवा में नियुक्त थी। कुब्जा की कथा श्रीकृष्ण की दिव्यता और उनके प्रेम और करुणा को दर्शाती है।
विषय सूचि
कुब्जा का जीवन परिचय – Who was Kubja?

कुब्जा का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। वह कंस की सेवा में सुगंधित द्रव्यों को तैयार और प्रस्तुत करने का कार्य करती थी। कुब्जा की शारीरिक बनावट असामान्य थी। उसकी कमर झुकी हुई थी, जिसके कारण उसे “कुब्जा” कहा जाता था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुब्जा का झुका हुआ शरीर उसकी पिछली जन्म की किसी घटना का परिणाम था। भले ही उसकी शारीरिक स्थिति उसे अलग बनाती थी, लेकिन वह अपने कार्य के प्रति समर्पित और निष्ठावान थी। कुब्जा का उल्लेख तब प्रमुखता से आता है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में कंस का वध करने के लिए प्रवेश किया।
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कुब्जा जब अपने दैनिक कार्य में लीन थी, तब श्रीकृष्ण और बलराम का मथुरा में आगमन हुआ था। उनकी सुंदरता, दिव्यता और तेजस्विता ने कुब्जा को आकर्षित किया और वह उनसे प्रभावित हुई। कुब्जा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि भगवान अपने भक्तों को उनकी स्थिति और परिस्थितियों से परे देखकर स्वीकार करते हैं।
श्रीकृष्ण और कुब्जा उद्धार – Shree Krishna & Kubja Uddhar
कुब्जा और श्रीकृष्ण का प्रथम मिलन मथुरा में हुआ, जब श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम के साथ कंस के वध के लिए पहुंचे। मथुरा की गलियों से गुजरते समय श्रीकृष्ण ने कुब्जा को देखा। वह कंस के लिए सुगंधित चंदन ले जा रही थी। श्रीकृष्ण ने कुब्जा को ‘सुंदरी’ कहकर संबोधित किया, जिससे कुब्जा व्यथित हो गई | उसने श्री कृष्ण से क्रोधित हो कर पुचा, ‘क्या तुम्हे मेरा कुरूप शरीर सुंदर दिखता है?’ | जिस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि, वे कुब्जा के अंदर की परम सुंदर आत्मा को देख रहे हैं। कुछ समय बातें करते करते, श्री कृष्ण कुब्जा को बताते हैं की अब तुम्हारे पुराने कर्मों के बंधन से मुक्त होने का समय आ गया है | तब श्री कृष्ण अपने एक हाथ से कुब्जा की ठुडडी को उपर उठाने लगते हैं | देखते ही देखते कुबडी कुब्जा का शारीर सामान्य हो जाता है और उसे सुका असली सौंदर्य पुन: प्राप्त होता है |
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तिलक युट्युब द्वारा प्रसारित इस विडियो में आप इस श्री कृष्ण लीला को देख सकते हैं | यह विडियो रमानंद सागर द्वारा बनाया गया था जो सुप्रसिद्ध श्री कृष्ण नाटक का हिस्सा है |
इस चमत्कार ने कुब्जा के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। यह घटना भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक है। कुब्जा ने श्रीकृष्ण को पहचाना और उनकी दिव्यता से आकर्षित होकर उनके पास आई। उसने भगवान श्रीकृष्ण को सुगंधित चंदन अर्पित किया। यह घटना उनकी भक्ति और प्रेम का प्रतीक थी। श्रीकृष्ण ने उसकी श्रद्धा को स्वीकार किया और उसे आशीर्वाद देने का निर्णय लिया।
कुब्जा उद्धार का आध्यात्मिक महत्व
कुब्जा की कथा हिंदू धर्म में गहरे आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ रखती है।
भक्ति का आदर्श- कुब्जा की भक्ति हमें यह सिखाती है कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम और समर्पण सभी बाधाओं को पार कर सकता है। भले ही कुब्जा की शारीरिक स्थिति कठिनाईपूर्ण थी, लेकिन उसकी भक्ति और श्रद्धा ने उसे भगवान के करीब लाया।
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श्रीकृष्ण की करुणा – कुब्जा की कहानी भगवान श्रीकृष्ण की करुणा और दया का उदाहरण है। उन्होंने कुब्जा को उसकी शारीरिक स्थिति के बावजूद स्वीकार किया और उसे आशीर्वाद दिया। यह घटना यह दर्शाती है कि भगवान अपने भक्तों की स्थिति या दोष को नहीं देखते, बल्कि उनके हृदय की पवित्रता को महत्व देते हैं।
प्रेरणा का स्रोत – कुब्जा की कथा आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि भगवान की भक्ति और आशीर्वाद से हर समस्या का समाधान संभव है। कुब्जा की कथा श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षाप्रद कहानी है। जो भक्ति, करुणा और दिव्यता के संदेश को प्रसारित करती है।

